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Dard Shayari
ठान लिया था किअब और नहीं
ठान लिया था किअब और नहीं
ठान लिया था किअब और नहीं लिखेंगे
पर उन्हें देखा और अल्फ़ाज़ बग़ावत कर बैठे
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इश्क का बटवारा रज़ामंदी से हुआचमक
मुनासिब समझो तो सिर्फ इतना ही
गजब का हुनर है हाथों में
देखना मै तुम्हे कहीं भूल ही
Wo aaj karta nazar andaaz to
वक्त के तराजू में अब किसे
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हम जा रहे हैं वहाँ जहाँ
तुम ने तो सोचा होगा मिल
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