भूखा पेट खाली जेब और झूठा प्रेम
इंसान को जीवन में बहुत कुछ सिखा जाता है

तुझ से नहीं तेरे वक़्त से नाराज हूँ
जो कभी तुझे मेरे लिए नहीं मिला

मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है
ज़िद तो उसकी है जो मुकद्दर में लिखा ही नहीं

एक बार फिर से निकलेंगे तलाश-ए-इश्क़ मे
दुआ करो यारो इस बार कोई बेवफ़ा न मिले

मेरा वक़्त भी क़यामत की तरह है
याद रखना ज़रूर आएगा

नसीब का खेल भी अजीब तरह से खेला हमने
जो न था नसीब में उसी को टूट कर चाह बैठे

टूटा तारा देखकर मांगते है कुछ न कुछ लोग
पर अगर वो दे सकता तो खुद क्यूँ तूट जाता

जब शीशे की अलमारी में रख कर जूते बेचें जाऐं
और किताबें फुटपाथ पर बिकती हों
तो समझलो कि दुनिया को ज्ञान की नहीं जूतो की जरूरत है

बुरी आदतें अगर वक़्त पे ना बदलीं जायें तो
वो आदतें आपका वक़्त बदल देती हैं

माना के मुमकिन नही तेरा मेरा हो जाना
पर सुनाहै इस दुनिया में चमत्कार बहुत होते है

आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से
आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा है

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी...
मुनासिब होगा कि अब मेरा हिसाब कर दे...!!” Er kasz

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको

गिरना भी अच्छा है औकात का पता चलता है

बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को अपनों का पता चलता है

कोन कहता है कि हमारी बात में वो अंदाज़ नहीं
तेरे अलग होने के बाद लोग हमे शायर कहते हैं