कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर
एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था

आज आईने के सामने खड़े होकर खुद से माफ़ी मांग ली मैंने ...
सबसे ज़्यादा खुद का ही दिल दुखाया है औरों को खुश करने में ...

मुझे किसी के बदल जाने का गम नही
बस कोई था जिस पर खुद से ज्यादा भरोसा था

बहुत तकलीफ देती है ना मेरी बातें तुम्हे
देख लेना एक दिन मेरी ख़ामोशी तुम्हे रुला देगी

हर जुर्म पे उठती है उँगलियाँ मेरी तरफ,
क्या मेरे सिवा शहर में मासूम है सारे?

नजर अंदाज करने की वजह कुछ तो बताते तुम
अब मैं कहा कहा खुद की बुराइया ढूँढू

Aakhir kyu bas jate hain dil me bina ijaazat liye ?
Wo log jinhe hum zindagi me kabhi paa nai sakte

कांटे तो नसीब में आने ही थे
फूल जो हमने गुलाब चुना था

उम्र भर उठाया बोझ दीवार पर लगी उस कील ने .......
और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ... Er kasz

मोहब्बत किसे कहते हैं मुझे मालूम नहीं

पर शायद ये वो रिश्ता है जो मेरा उससे उसका किसी और से है

ऐसा नहीं की अब तेरी जरूरत नहीं रही,
बस टूट के बिखरने की अब हिम्मत नहीं रही…

किसी के दिल में क्या छुपा है, ये बस खुदा ही जानता है.
दिल अगर बेनकाब होता, तो सोचो कितना फसाद होता.
Er kasz

गरूर तो नहीं करता लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है..
कि अगर याद नहीं करोगे तो भुला भी नहीं सकोगे.!!!

Soch raha hun ab bewafa hone ka tarika seekh lun
Muhabbat de de ke hum ne apni qadr kho di

माँ कहती है मेरी दौलत है तू
और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है