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Dard Shayari
डूबी हैं उगंलिया अपने ही लहू
डूबी हैं उगंलिया अपने ही लहू
डूबी हैं उगंलिया अपने ही लहू मे
ये कांच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है
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