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Two Lines
Dard Shayari
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल छोटा करूँ.
वो उतनी ही कर सकी वफ़ा जितनी उसकी औकात थी.
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