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Dard Shayari
शायरी का बादशाह हुं और कलम
शायरी का बादशाह हुं और कलम
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी
अल्फाज़ मेरे गुलाम है बाकी रब की महेरबानी
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काश मै लौट पाऊँ बचपन कि
Vo samjh hi na sake mere
दर्द इतना था ज़िंदगी में कि
गलतफहमी मे जीने का मजा कुछ
बदन समेट के ले जाए जैसे
जब भी देखता हुं हसते खिलखिलाते
तेरी मुहब्बत भी किराये के घर
मेरे ही किनारे मुझमें डूब जाते
तुम्हारे बाद जो होगी वो दिल्लगी
खुद पर भरोसा करने का हुनर
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