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Two Lines
Kashish Shayari
काश वो भी बेचैन होकर कह
काश वो भी बेचैन होकर कह
काश वो भी बेचैन होकर कह दे मेँ भी तन्हा हूँ
तेरे बिन तेरी तरह तेरी कसम तेरे लिए
Er kasz
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सो जाता है वो मालकिन की
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जला दी जाती है ससुराल में
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अक्सर वही लोग उठाते हैं हम
यूँ ही शौक़ है हमारा तो
अपने हर एक लफ्ज़ का खुद
कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहियेमंजिल
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