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Two Lines
Kashish Shayari
ये कलयुग है कोई भी चीज़
ये कलयुग है कोई भी चीज़
ये कलयुग है कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें
कली फल फूल पेड़ पौधे सब माली बेच देता है
er kasz
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