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Taarif Shayari
जितना आज़मा सकते हो आज़माओ सब्र
जितना आज़मा सकते हो आज़माओ सब्र
जितना आज़मा सकते हो आज़माओ सब्र मेरा
हम भी देखें हम टूट कर कब तलक बिखरते हैं
er kasz
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Mere hi hatho main likhi h
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शायरी का बादशाह हुं और कलम
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नाजुकी उनके लबों की क्या कहियेपंखुड़ी
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