एक रात वो देर से घर आया अपनी माँ को बाहर दरवाजे पर पाया..!!
माँ ने कहा बेटा जब तक जिंदा हुँ जल्दी घर आ जाया कर बेटा!
=RPS

कमा के इतनी दोलत भी मैं अपनी माँ को दे ना पाया
के जितने सिक्कों से माँ मेरी नज़र उतार कर फेक दिया करती थी

ये तो सच है क़ि हमें चाहने वाले बहुत हैं
पर ये भी ज़िद है क़ि हमें सिर्फ तुम चाहो

बेटी को जिसने मरवा दिया था पत्नी के कोख में
मोहल्ले में लडकिया ढूँढ रहा है नवरात्रे के कन्या भोज में

हजार के नोटों से तो बस जरूरतें पूरी होती हैं
मजा तो माँ से मांगे एक रुपये के सिक्के में था

सो जाता है वो रोज मालकिन की मार खाकर
सबके नसीब में माँ की लोरियाँ नहीं होती

दम तोड़ देती है माँ-बाप की ममता जब बच्चे कहते है
तुमने किया ही क्या है हमारे लिए
Er kasz

साज़िशे लाखो बनती है मेरी हस्ती मिटाने की
बस दुआँए मेरी माँ की उन्हेँ मुक्कमल नही होने देती
er kasz

जो इंसान इतनी प्रचंड गर्मी में कूलर का मुँह
अपनी तरफ से हटाकर तुम्हारी तरफ कर दे
उस इंसान को माँ कहते है

तेरे बिना मैं ये दुनिया छोड तो दूं पर उस माँ दिल कैसे दुखा दुं
जो रोज दरवाजे पर खडी कहती है “बेटा घर जल्दी आ जाना “

माँ कहती है बिल्ली रास्ता काटे तो रुक जाना चाहिये
मैं रुक जाता हूँ अन्धविश्वास को नहीं मानता मैं माँ को मानता हूँ।

बस दुआयें बटोरने आयी हूँ
माँ ने कहा दौलत तो साथ जाती नहीं

पूछता हे जब कोई की दुनिया मै मोहब्बत है कहाँ
मुस्कुरा देता हु मै ओर याद आ जाती है माँ

उसका काला टीका किसी सुदर्शन चक्र से कम नहीं
माँ एक उंगली काजल से सारी बलायें टाल देती है

Roti rahi sarri ratt vo islaiye
Jo pyas bhuj jaye uske bache ki