ये ना पूछ के शिकायतें कितनी हैं तुम से,
तू बता के तेरा कोई और सितम बाक़ी तो नही .

सच ही कहा था किसी ने तनहा जीना सीख
मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो तनहा छोड़ जाती है

इतना सा मेरे पे एहसान किया कर,
मेरी आँखों में देख के मेरा दर्द पेहचान लिया कर.

काश तू सुन पाता खामोश सिसकियां मेरी आवाज़ करके रोना
तो मुझे आज भी नहीं आता !!. Er kasz

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तेरी मुहब्बत भी किराये के घर की तरह थी…. .
कितना भी सजाया पर मेरी नहीं हुई…. Er kasz

मोहब्बत की है "कोई कत्ल🔪 तो नहीँ"
क्युँ बार-बार कहते है लोग "जरा बचकर रहना" Er kasz

मजिंल पाना तो , बहुत दूर की बात है ..
गुरूर में रहोगे तो , रास्तें भी न देख पाओगे.......Er kasz

ऐसा नहीं कि दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी

पर हाथो में तेरे नाम की लकीर नहीं थी

उसकी याद में दिल चीख-चीख कर रोता हैं
और दुनियाँ कहती हैं इश्क बेजुबान होता हैं

" धडकनें इस दिल की कभी बंद
नहीं होगी...
बस तुम इस दिल से निकल कर
कहीं मत जाना." Er kasz

माना कि बहुत कीमती है वक्त तुम्हारा मगर
हम भी नायाब हैं ये तुम्ही ने कहा था कभी.

शायर बना दिया अधूरी मोहब्बत ने
मोहब्बत अगर पूरी होती तो हम भी एक ग़ज़ल होते
Er kasz

मोहब्बत ख़ूबसूरत होगी किसी और दुनियाँ में
इधर तो हम पर जो गुज़री है हम ही जानते हैं

काश वो भी बेचैन होकर कह दे मेँ भी तन्हा हूँ
तेरे बिन तेरी तरह तेरी कसम तेरे लिए
Er kasz

पानी से भरी आँखें लेकर वह मुझे घूरता ही रहा,
वह आईने में खङा शख्स परेशान बहुत था आज ..!!