‪#‎वो‬ तो ‪अपनी‬ एक ‪#‎आदत‬ को ‪#‎भी‬ ना ‪#‎बदल‬ सका,
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.........‪#‎जाने‬ क्यूँ मैंने ‪#‎उसके‬ लिए अपनी ‪#‎जिंदगी‬ बदल ‪#‎डाली‬ ! Er kasz

मैंने दिल के दरवाजे पर लिखा अंदर आना सख्त मना है
प्यार हँसता हुआ आया और बड़ी मासूमियत से बोला मुझे माफ करना मैं तो अन्धा हूँ

मेरी मोहोब्बत को ठुकरा दे चाहे,
मैं कोई तुज़से ना शिकवा करुन्गा,
आंखो मे रेहती है तस्वीर तेरी,
सारी उमर तेरी पूजा करुन्गा...

हथेली पर रखकर नसीब अपना
क्यूँ हर शख्स मुकद्दर ढूँढ़ता है
अजीब फ़ितरत है उस समुन्दर की
जो टकराने के लिए पत्थर ढूँढ़ता है

उनको जाना था वो चले गए, हम को खोना था हम ने खो गये
फर्क सिर्फ इतना था उस ने ज़िंदगी का एक पल खोया,
हम ने एक पल में पूरी ज़िंदगी खो दी...