मोबाइल के एक फोल्डर में तेरी तस्वीरें इकठ्ठा की है मैंने
बस इसके सिवा और ख़ास कुछ जायदाद नहीं है मेरी

आईने के सामने खड़े होकर खुद से माफ़ी मांग ली मैंने
सबसे जायदा खुद का दिल दुःखाया है दुसरो को खुश करने मे

तू कल की तरह आज नहीँ साथ मेरे तो क्या हुआ
कैसे बताऊँ तुझे कि मोहब्बत तो हम तेरी दुरीयोँ से भी करतेँ हैँ

एक अज़ीब सा रिश्ता है मेरे और ख्वाहिशों के दरम्यां,
वो मुझे जीने नही देती… और मै उन्हे मरने नही देता.Er kasz

नीलाम कुछ इस कदर हुए, बाज़ार-ए-वफ़ा में हम आज,
बोली लगाने वाले भी वो ही थे, जो कभी झोली फैला कर माँगा करते थे!! Er kasz

रहते है वो किसी की याद में या आता है कोई उनके ख्वाब में
पर यक़ीनन इतना हसीन मुकाम नही लिखा हमारे नसीब में

अगर कुछ बनना है तो गुलाब बनो,
क्यों की ये फूल उसके हाथ में भी खुशबू छोड़ देता है,
जो इसे मसल कर फेक देता है,

माना कि बहुत ख़ास हूँ मैं कुछ लोगो के लिए
लेकिन चन्द लम्हों से ज्यादा कोई ना रोयेगा मेरे गुजर जाने के बाद

नाराज़ क्यों होते हो यार चले जायेंगे तेरी महफ़िल से
जहाँ कोई जान के अनजान हो जाए वहाँ हम रुका करते भी नहीं!

नाम तो लिख दूँ उसका अपनी हर शायरी के साथ
मगर फिर ख्याल आता है मासूम सा है सनम मेरा कहीं बदनाम ना हों जाये…

अगर किसी दिन तुम्हे रोना आये तो कॉल जरूर कर लेना
हँसाने की गारंटी तो नही लेता पर तेरे साथ रोऊँगा जरूर
Er kasz

सुनो एक वादा करोगी मुझसे क्या तुम उन पलो को हमेशा संभाल के रखोगी

जिन पलो में तुम मेरे साथ मुस्कुराई थी

पूछते हैं सब लोग तुम इतनी अच्छी शायरी कैसे करते हो ,,
तो मुस्कुरा कर कहता हूँ सब कमाल उस जालिम के दर्द का है ....

ིइतना तो दर्द मुझे जिन्दगी तूने दिया ही नहीं था
जितना बदनाम मैने तूझे वाह वाहीया बटोरने के लिए कर दिया
er kasz

अगर मेरी शायरियों से बुरा लगे तो बता देना दोस्तों
मैं दर्द बाँटने के लिए लिखता हूँ दर्द देने के लिए नही
Er kasz