हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए…!!

यह दुनिया भी कितनी अजीब है दोस्तों
आदमी से भरी आदमी की ही कमी है

जिन्दगी की उलझनों ने कम कर दी हमारी शरारते
और लोग समझते हैं कि हम समझदार हो गये
er kasz

किसी ने आज पूछा हमसे कहाँ से लाते हो ये शायरी
मैं मुस्करा के बोला उसके ख्यालो मे डूब कर
Er kasz

Rani nahi apne pas abhi to kya hua
ye badshah aaj bhi lakho dilo par raj karta hai

ये मुहब्बत भी है क्या रोग

जिसे भूले वो सदा याद आया

अनजान अपने आप से वह शख्स रह गया
जिसने उमर गुज़ार दी औरों की फ़िक्र में..

हमें भी आते है अंदाज़ दिल तोड़ने के
हर दिल में ख़ुदा बसता है यही सोचकर चुप हूँ मैं

मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है
ज़िद तो उसकी है जो मुकद्दर में लिखा ही नहीं
G.R..s

किसी के दिल में क्या छुपा है, ये बस खुदा ही जानता है.
दिल अगर बेनकाब होता, तो सोचो कितना फसाद होता.
Er kasz

Alvida hote hue unse koi nishani mangi
wo muskurakar bole judai kafi nahi hai kya

दिल तो करता है चिर के रख दू ऐ दिल तुझे
ना तू रहे मुझ में ना वो रहे तुझ में

तु हर साँस के साथ याद आती है अब तु ही बता
तेरी याद को रोक दूँ या अपनी साँस को

चलो माना की हमें प्यार का इजहार करना नही आता
जज़्बात ना समझ सको इतने नादान तो तुम भी नही
er kasz

खिलौने गुब्बारे और चॉकलेट सब लेकर देख लिए मैंने
उम्र ए जवानी फिर न मुस्कुरायी कभी बचपन की तरह