जिदंगी में कभी किसी बुरे दिन से रूबरू हो जाओ
तो इतना हौंसला जरुर रखना की दिन बुरा था जिंदगी नहीं

अभी लिखी है गज़ल तो अभी दीजिये दाद़
वो कैसी तारीफ जो मिले मौत के बाद

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी...
मुनासिब होगा कि अब मेरा हिसाब कर दे...!!” Er kasz

है कौन सा ये शहर जहां कोई न हमसफर
बस्तियों में गुल खिले हैं, पर खुशबू है बेअसर
er kasz

जी भर कर जुल्म कर लो......
क्या पता मेरे जैसा कोई बेजुबान तुम्हें फिर मिले ना मिल*::*""!! Er kasz

याद आयेगी मेरी तो बीते कल को पलट लेना
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराता हुआ मिल जाऊंगा
Er kasz

मैं जानता हूँ मेरी खुद्दारियां तुझे खो देंगी लेकिन
मैं क्या करूँ मुझ को मांगने से नफ़रत है
Er kasz

रोता वही है जिसने महसूस कि हो सच्ची मोहब्बत को
वरना मतलब के रिश्तें रखने वाले को तो कोई भी नही रूला सकता

Milna tha ittefaq bicharna naseeb tha
wo itne dur ho gaya jitne qareeb tha

Vo samjh hi na sake mere dardo ko
Hame lagga unhe dikhta nahi
Shayad unhe padhna Bhi nahi atta
Er kasz

जिनके चेहरे अक्सर मुस्कुराते हैं
उनकी आँखें हमेशा उदास होती हैं

इंतजार की और क्या हद होगी
हमारी तो आँखे भी खुली रही मरने के बाद
er kasz

वहा तक तो साथ चल जहा तक मुमकीन है।
जहा हालात बदल जाये तुम भी बदल जाना
Er kasz

बुरी आदतें अगर, वक़्त पे ना बदलीं जायें
तो वो आदतें, आपका वक़्त बदल देती हैं

अपनी जवानी में और रखा ही क्या है कुछ तस्वीरें यार
की बाकी बोतलें शराब की
Er kasz