मैं तुझ पे अपनी जान तक लुटा दूँ..
तू मुझ से मुझ जैसी मोहब्बत तो कर.

तू बदनाम ना हो इसलिए जी रहा हुँ मै
वरना मरने का इरादा तो रोज होता है

मैं तुझे सोचकर इतना लिख देता हूँ
और एक तु हैं कि याद भी नहीं करती मुझे

करीब आओगे तो शायद हमें समझ लोगे
ये फासले तो ग़लतफ़हमियां बढ़ाते हैं

जो तड़प तुझे किसी आईने में न मिल सके..
तो फिर आईने के जवाब में मुझे देखना.!

इसी बात ने उसे शक मेँ डाल दिया हो शायद
इतनी मोहब्बत उफ्फ कोई मतलबी ही होगा

बहुत भीड़ है इस मोहब्बत के शहर मे
एक बार जो बिछडा वो दोबारा ही नही मिलता
G.R..s

तुम अपने बारे मै मुझसे भी पुछ सकते हो
ये तुमसे किसने कहा की आईना ही जरूरी है

बख्शे हम भी न गए, बख्शे तुम भी न जाओगे,
वक्त जानता है, हर चेहरे को बेनकाब करना...!

शायर बना दिया अधूरी मोहब्बत ने
मोहब्बत अगर पूरी होती तो हम भी एक ग़ज़ल होते
Er kasz

मोहब्बत में कभी कुछ वादे किये थे तूने
आज टूटे हुए वादे भी तेरा रास्ता देखते हैं

उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्ज़ुब कैसा
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है

जिन्दगी की उलझनों ने कम कर दी हमारी शरारते
और लोग समझते हैं कि हम समझदार हो गये
er kasz

तुम ही ने सफर करवाया था मोहब्बत की कस्ती पर,
अब नजरे ना चुरा, मुझको डूबता हुआ भी देख !

तुम एक महँगा खिलौना हो और मै एक गरीब का बच्चा
मेरी हसरत ही रहेगी तुझे अपना बनाने की