यार बता दे ज़रा कैसे करुँ मेँ इजहार ऐ ईश्क..
शायरी वो समझते नहीँ और अदाए हमें आती नहीँ

अब तुझसे शिकायत करना,मेरे हक मे नहीं,
क्युकी तू आरजू मेरी थी,पर अमानत शायद किसी और की ।।

जब बिखरेगा तेरे रूखसार पर तेरी आँखों का पानी
तुझे एहसास तब होगा मोहब्बत किस को कहते है

किसी ने आज पूछा हमसे कहाँ से लाते हो ये शायरी
मैं मुस्करा के बोला उसके ख्यालो मे डूब कर
Er kasz

तैरना तो आता था हमे मोहब्बत के समंदर मे लेकिन
जब उसने हाथ ही नही पकड़ा तो डूब जाना अच्छा लगा

मेरा दिल मुझसे कहता है कि वो बापस आयेगी
मैँ दिल से कहता हूँ कि उसने तुझे भी झूठ बोलना सिखा दिया

ये मोहब्बत के हादसे अक्सर दिलों को तोड़ देते हैं
तुम मंज़िल की बात करते हो लोग राहों में छोड़ देते हैं

जिस्म से होने वाली मोहब्बत का इजहार आसान होता है
रुह से हुई मोहब्बत को समझाने में जिंदगी गुजर जाती है

Hadd ho gai intezar ki
aisi ki taisi aise pyar ki

Suno Wo Jo Tera kch Ni Lgta
Tujh Bin Pareshan Rhta Hai

Mujhse Ab Shayari Nahi Hoti
Mujhe Lafzon Ne Maar Daala Hai

Aksar Ye Ehsas Hota Hai Mujhy
Tumhein Koi Ehsas Nahiin Mera

Beauty doesnt last forever
but a beautiful personality does

Ishq itne qareeb se guzra
Mai yeh samjha ke ho chuka mujh ko

arasti baarish mein yaad rakhna
tumhen satayengi meri aankhain