Mein tanhaa tha magar itnaa nahin tha
Meri tanhai mukammal tere aaney se hui

Bharosa Dua Wafa Khawab Maan Mohabbat
Kitne Naam on Mein Simte Ho Sirf Ek Tum

Tanhayi Ke Aatishdaan Me Main Lakri Ki Tarah Jalta Tha
Tere Saath Tere Hamraahi Mere Saath Mera Rasta Tha

माना की बुरा हु
लेकिन इतना भी नहीं की याद भी न आउ

मेरा रब भी रूठा है मुझसे शायद
मैं तुझे मांगू भी तो किससे
Er kasz

बेइंतहा इश्क़ करने लगे हैं उनसे
इक पल मिलना हमसे जिसे गवारा नहीं

ना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन
बेहद ही करीब से गुजर कर बिछड़ गया कोई

इतना भी हमसे नाराज़ मत हुआ करो
बदकिस्मत ज़रूर हैं हम मगर बेवफा नहीं

अब तो बहुत कम है दर्द मेरे दिल का
सुना है किसी से पूछा था उसने हाल मेरा

बेदर्द सनम हमको भी कहाँ आती थी शायरी
तेरी जुल्फ के शिकार है बस तब से बिमार है

ऐसा नहीं कि दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी

पर हाथो में तेरे नाम की लकीर नहीं थी

Shayad Isiliye main Nakaam Rahi Aksar
Cheez jo maangi sab se juda maangi

Aagaz e Ishq bhi Khub tha Ghalib kya kahun
Pehle to thi dil lagi phr dil ko ja lagi

Meri subha udas hai aur sham meri tanha si
Kya kasoor tha mera sirf tujhse mohbbat ke siwa

जब तक तेरे पास पैसा है तब तक दुनीया बोलेगी
भाई तू कैसा है