ना जाने कितनी मोहब्बत थी उसकी नफरत में
कि दुआओं से बेहतर थी बद् दुआ उसकी

दिल दिया है तो दिल मिला भी होगा किसी से
क्यों इश्क में हिसाब किए फिरते हो

लिख दे मेरा अगला जन्म उसके नाम पर ऐ खुदा
इस जन्म में ईश्क थोडा कम पड गया है

हमें रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि
रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ

कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे
मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं

क्या लिखूँ दिल की हकीकत आरज़ू बेहोश है
ख़त पर हैं आँसू गिरे और कलम खामोश है

लफ़्ज़ अल्फ़ाज़ कागज़ और किताब
कहाँ कहाँ नहीं रखता तेरी यादों का हिसाब
er kasz

मेरी जिन्दगी का खेल तो शतरंज से भी मजेदार निकला
मै हारा भी तो अपने ही रानी से

हमारे तजूँबे हमें ये भी सबक सीखाता है
की जो मख्खन लगाता है वो ही चुना लगाता है

शिकस्त पर शिकस्त दिये जा रही है ज़िन्दगी
जाने किस राह लिये जा रही है ज़िन्दगी

ये इश्क़ मोहब्बत की रिवायत भी अजीब है
पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते

छोड़ तो दिया मुझे पर कभी ये सोचा है
तुमने अब कभी झूँठ बोला तो कसमें किसकी खाओगी

नींद आए या ना आए चिराग बुझा दिया करो
यूँ रात भर किसी का जलना हमसे देखा नहीं जाता

"दिन तो कट जाता है शहर की रौऩक में
पर कुछ लोग बहुत याद आते हैं शाम ढल जाने के बाद

शायर बना दिया अधूरी मोहब्बत ने
मोहब्बत अगर पूरी होती तो हम भी एक ग़ज़ल होते
Er kasz