कैसे भुला दूँ उसको मैं..
मौत इंसानों को आती है यादो को नहीं...

भरोसा जितना कीमती होता है...
धोखा उतना ही महंगा हो जाता है...Er kasz

कब तक भूगतूँ मै अब सज़ा तेरी
एइश्क गलती हो गई बस माफ़ कर अब मुझे

शेरों को कहना नया शिकारी आया हैं
या तो हुकूमत छोड़ दे या जीना

अच्छा हुआ तूने ठुकरा दिया मुझे
प्यार चाहिए था तेरा एहसान नही

आँधियों ने लाख बढ़ाया हौसला धूल का
दो बूँद बारिश ने औकात बता दी

इतना दर्द तो मोत भी नहीं देती है
जितना तेरी ख़ामोशी ने दिया है…

खफा नहीं हूँ तुझसे ए जिंदगी
बस जरा दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से

गुनाह मुझे मेरे सामने गिनवा दो
बस जब कफ़न में छुप जाऊ तो बुरा न कहना

जिस घाव से खून नहीं निकलता
समज लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है

तुझको भूलूँ कोशिश करके देखूंगा
वैसे दरिया उल्टा बहना मुश्किल है

दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी

मुझे मेरी कल कि फिकर नही है,
पर ख्वाईश तो उसे पाने की जन्नत तक रहेगी....

जहा हर बार अपनी बातो पर सफाई देनी पड़ जाए.
वो रिश्ते कभी गहरे नही होते ..!!

पता नहीं अब हक़ है भी या नहीं...
पर तेरी परवाह करना मुझे आज भी अछा लगता है...