लोग मुझसे मेरी उदासी की वजह पूछते है
इजाजत हो तो तेरा नाम बता दूँ...??

बहुत नजदीक से गुजरे वो बेखबर बनकर
कल तलक साथ थे जो मेरे हमसफर बनकर

गुनाह मुझे मेरे सामने गिनवा दो
बस जब कफ़न में छुप जाऊ तो बुरा न कहना

जिस घाव से खून नहीं निकलता
समज लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है

तुझको भूलूँ कोशिश करके देखूंगा
वैसे दरिया उल्टा बहना मुश्किल है

दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी

मुझे मेरी कल कि फिकर नही है,
पर ख्वाईश तो उसे पाने की जन्नत तक रहेगी....

बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं
अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती

तू इक क़दम भी जो मेरी तरफ बढ़ा देता
मैं मंज़िलें तेरी दहलीज़ से मिला देता

पता नहीं अब हक़ है भी या नहीं...
पर तेरी परवाह करना मुझे आज भी अछा लगता है...

मंजिल का नाराज होना भी जायज था
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे

बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने
फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए
Er kasz

तेरी तस्वीर को सीने से लगा रखा है
मैंने दुनियां से अलग गाँव बसा रखा है

आज कुछ नही है मेरे पास लिखने के लिए
शायद मेरे हर लफ्ज़ ने खुद-खुशी कर ली

किसी भी मौसम में ख़रीद लीजिये ज़नाब
मोहब्बत के ज़ख्म हमेशा ताजा मिलेंगे