तजुर्बे ने एक बात सिखाई है
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है

मंजिल का नाराज होना भी जायज था
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे

अब तो बहुत कम है दर्द मेरे दिल का
सुना है किसी से पूछा था उसने हाल मेरा

नसीब का खेल भी अजीब तरह से खेला हमने
जो न था नसीब में उसी को टूट कर चाह बैठे

मेरा टूटना बिखरना एक इत्तेफाक नहीं
बहुत मेहनत की है एक शक्स ने इसकी खातिर

मुझे ढूंढने की कोशिश न किया कर पगली
तूने रास्ता बदला मैंने मंज़िल ही बदल दी

ना जाने क्यों मुझे लोग मतलबी कहते है
एक तेरे सिवा दुनियां से मतलब नहीं मुझे

चाँद सा मुखड़ा दिखाकर मुँह छिपाना छोड़ दो
लगाकर दिल हटा लेना जुल्म ढाना छोड़ दो

उदास दिल है मगर मिलता हूँ हर एक से हंस कर
यही एक फन सीखा है बहुत कुछ खो देने के बाद

नाज है मुझे तेरी नफरतों का अकेला वारिस हूँ
मोहोबत तो तुम्हे बहोत से लोगों से है

पता नहीं क्या रिश्ता था टहनी से उस पंछी का
उसके उड़ जाने पर वो कितनी देर कांपती रही

मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना
कभी बात करने की हसरत कभी देखने की तमन्ना

मत पूछो कैसे गुजरता है हर पल तुम्हारे बिना,
कभी बात करने की हसरत
कभी देखने की तमन्ना...❗❗

Khud hi de jaoge to behtar hai
Warna hum dil chura bhi lete hain

Shaadi ko to logo ne aise hi badnam Kia hua hai
Taklif to ladkiya deti h