मौत से ज्यादा वफादार नहीं कोई
आएगी एक दिन और सदा के लिए

अपने उसूल कभी यूँ भी तोड़ने पड़े खता उसकी थी
हाथ मुझे जोड़ने पड़े

मेरा टूटना बिखरना एक इत्तेफाक नहीं
बहुत मेहनत की है एक शक्स ने इसकी खातिर

अंदर कोई झांके तो टुकड़ो में मिलूंगा मैं
यह हँसता हुआ चेहरा तो ज़माने के लिए है

मैंने दिल के दरवाजे पर लिखा अंदर आना सख्त मना है
प्यार हँसता हुआ आया और बड़ी मासूमियत से बोला मुझे माफ करना मैं तो अन्धा हूँ

Mein tanhaa tha magar itnaa nahin tha
Meri tanhai mukammal tere aaney se hui

Meri tanhayi ko mera shoq mat samajhna
Bohat pyar se diya hai yeh tohfa kisi ne

माना की बुरा हु
लेकिन इतना भी नहीं की याद भी न आउ

बुरा हमेशा वही बनता हे,
जो अच्छा बनके टूट चूका होता हे.

वो भी जिन्दा है मै भी जिन्दा हूँ
कत्ल तो सिर्फ इश्क का हुआ है

मेरी खुद्दारी इजाज़त नही देती
कैसे कहूँ कि मुझे तेरी जरुरत है

लोग मुझसे मेरी उदासी की वजह पूछते है
इजाजत हो तो तेरा नाम बता दूँ...??

गलतफहमी मे जीने का मजा कुछ और ही है
वरना हकीकत तो अक्सर रुला देती है

बेदर्द सनम हमको भी कहाँ आती थी शायरी
तेरी जुल्फ के शिकार है बस तब से बिमार है

मेरी जिन्दगी का खेल तो शतरंज से भी मजेदार निकला
मै हारा भी तो अपने ही रानी से