हम तो फना हो गए उनकी आँखे देखकर ग़ालिब; ना जाने वो आइना कैसे देखते होंगे!

तुझें झूठ बोलना हम ही ने सिखाया है
तेरी हर बात को सच मान-मान कर

आराम से कट रही थी तो अच्छी थी; जिंदगी तू कहाँ इन आँखों की बातों में आ गयी!

अच्छी सूरत को सवारने की ज़रूरत क्या है; सादगी भी तो क़यामत की अदा होती है।

हमारा क़त्ल करने की उनकी साजिश तो देखो; गुज़रे जब करीब से तो चेहरे से पर्दा हटा लिया।

फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम; प्यार में खहकता जाम हो तुम; तुम्हें दिल में छुपाये फिरते हैं; ऐ दोस्त मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम।

हसरत है सिर्फ तुम्हें पाने की; और कोई ख्वाहिश नहीं इस दीवाने की; शिकवा मुझे तुमसे नहीं खुदा से है; क्या ज़रूरत थी तुम्हें इतना खूबसूरत बनाने की?

हुनर सड़को पर तमाशा करता है
और किस्मत महलो पर राज़ करती है

आँख बंद करके चलाना खंजर मुझ पे; कही तुम मुस्कुरा दिए तो हम बिना खंजर ही मर जायेंगे।

अब तो यूँ हो गए हैं मदहोश तेरी निगाह देख कर; सदियों से पिये बैठे हैं जैसे जाम तेरी निगाह देख कर।

पलकों को जब-जब हमने झुकाया है; बस एक ही ख्याल आया है; कि जिस खुदा ने तुम्हें बनाया है; तुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया है!

सोचा था इस कदर उनको भूल जाएँगे; देखकर भी उनको अनदेखा कर जाएँगे; पर जब जब सामने आया उनका चेहरा; सोचा एस बार देख ले अगली बार भूल जाएँगे।

दीवाने हैं तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं; कैसे कहें कि हमें तुमसे प्‍यार नहीं; कुछ तो कसूर है आपकी आँखों का; हम अकेले तो गुनहगार नहीं।

कुछ इस तरह से वो मुस्कुराते हैं; कि परेशान लोग उन्हें देख खुश हो जाते हैं; उनकी बातों का अजी क्या कहिये; अल्फ़ाज़ फूल बनकर होंठों से निकल आते हैं।

कहाँ से लाऊं वो शब्द जो तेरी तारीफ के क़ाबिल हो; कहाँ से लाऊं वो चाँद जिसमें तेरी ख़ूबसूरती शामिल हो; ए मेरे बेवफा सनम एक बार बता दे मुझकों; कहाँ से लाऊं वो किस्मत जिसमें तु बस मुझे हांसिल हो।