झुकी हुई पलकों से उनका दीदार किया; सब कुछ भुला के उनका इंतजार किया! वो जान ही न पाए जज्बात मेरे; जिन्हें दुनिया में मैंने सबसे ज्यादा प्यार किया!

मत सोचना मेरी जान से जुदा है तू; हकीकत में मेरे दिल का खुदा है तू।

नजर झुका के बात कर पगली
नजर उठ गइ ना तो प्यार में पड जायेगी
G.R..s

बदला वफाओं का देंगे बहुत सादगी से हम; तुम हमसे रूठ जाओ और ज़िंदगी से हम।

सजते दिल के तराने बहुत है; जिंदगी जीने के बहाने बहुत है; आप हमेशा मुस्कुराते रहो; आपकी मुस्कुराहट के दीवाने बहुत है।

वो मेरे सामने बैठे हुए हैं; मगर यह फ़ासला भी कम नहीं।

मुझे उस जगह से भी मोहब्बत हो जाती है; जहाँ बैठ कर एक बार तुम्हें सोच लेता हूँ।

दिल की आवाज़ को इज़हार कहते है! झुकी निगाह को इकरार कहते है! सिर्फ पाने का नाम इश्क नहीं! कुछ खोने को भी प्यार कहते है!

काश कि तु चाँद और मैं सितारा होता; आसमान में एक आशियाना हमारा होता; लोग तुम्हे दूर से देखते; नज़दीक़ से देखने का हक़ बस हमारा होता।

दिल ही दिल में हम तुमसे प्यार करते हैं; हम ऐसे हैं जो मोहब्बत में जाँ निसार करते हैं; निगाहें मिलाते हैं अक्सर लोगों से छुपाकर; जैसे किसी गुनाह को यारो गुनाहगार करते हैं।

मैं खुद पहल करूँ या उधर से हो इब्तिदा; बरसों गुज़र गए हैं यही सोचते हुए।

वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है; बस मुस्कुराता है और दिल खरीद लेता है।

प्यार तो किया मैंने बहुत; मगर इज़हार न करना आया; उसने पूछा तो मुझसे बहुत; मगर इकरार न करना आया!

खुद को खुद की खबर न लगे! कोई अच्छा भी इस कदर न लगे! आप को देखा है बस उस नज़र से! जिस नज़र से आप को नज़र न लगे!

हमे भुला कर तो देखो ; हर ख़ुशी तुमसे रूठ जाएगी; जब भी देखोगे आईने में सूरत अपनी; हमारी ही सूरत नज़र आएगी।