चिरागों को आंखों में महफूज रखना; बड़ी दूर तक रात ही रात होगी; मुसाफिर हो तुम भी मुसाफिर हैं हम भी; किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।

हो सजा ए मौत तो क्या लम्हा होगा
के हम क़ाज़ी से आखरी ख्वाईश में तेरी मुलाक़ात मांगेंगे

जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो: जब आँख बंद हो तो यादेँ हिन्दुस्तान की हो: हम मर भी जाए तो कोई गम नही लेकिन; मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो।

इतनी अहमियत तो दोस्तो में बना ही ली है
कि मेला लग जायेगा उस दिन शमशान मे
जिस दिन मैं चला जाँऊगा आसमान मे

तेवर तो हम वक्त आने पे दिखायेंगे
शहेर तुम खरीदलो उस पर हुकुमत हम चलायेंगे

मेरा दिल मुझसे कहता है कि वो बापस आयेगी
मैँ दिल से कहता हूँ कि उसने तुझे भी झूठ बोलना सिखा दिया

हम चाहे न चाहे निगाहे मिल ही जाती हैं
निगाहे तो जरिया है दो दिलो के मिलने का
जब मिलने हो दो दिल , निगाहे मिल ही जाती है

शिकायत तो नहीं कोई मगर अफ़सोस इतना है
मुहब्बत सामने थी और हम दुनिया में उलझे थे

जो सुरूर है तेरी आँखों में वो बात कहां मैखाने में
बस तू मिल जाए तो फिर क्या रखा है ज़माने में

मेरे वजूद में काश तू उतर जाए;​​​मैं देखूं आइना और तू नजर आए;​​​​तु हो सामने और वक़्त ठहर जाए;​​​ये जिंदगी तुझे यूँही देखते हुए गुजर जाए।

साला प्यार भी अजीब होता है
जिससे होता है उसको छोड़कर पुरे मोहल्ले को पता होता है
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तुम मुझे कभी दिल से कभी आँखों से पुकारो; ये होठों के तकल्लुफ तो ज़माने के लिए होते हैं!

यादों के भंवर में एक पल हमारा हो; खिलते चमन में एक गुल हमारा हो; जब याद करें आप अपने चाहने वालों को; उन नामों में बस एक नाम हमारा हो।

चूमना क्या उसे आँखों से लगाना कैसा; फूल जो कोट से गिर जाये उठाना कैसा; अपने होंठों की हरारत से जगाओ मुझको; यूं सदाओं से दम-ए-सुबह जगाना कैसा!

घर उसने क्या बनाया मस्जिद के सामने; चाहत ने उसकी हमें नमाजी बना दिया।