कड़वी बात है लेकिन सच है
हम किसी के लिए उस वक़्त तक स्पेशल है
जब तक उन्हें कोई दूसरा नहीं मिल जाता.

सिगरेट जलाई थी तेरी याद भुलाने को
मगर कम्बख्त धुए ने तेरी तस्वीर बना डाली

सरहदों पर बहुत तनाव है क्या​;​​​​ कुछ पता तो करो चुनाव है क्या​;​​ खौफ बिखरा है दोनों समतो में​;​​ तीसरी समत का दबाव है क्या​।

दीवार क्या गिरी मेरे कच्चे मकान की; लोगों ने मेरे आँगन से रस्ते बना लिए।

आज इतना जहर पिला दो की मेरी साँस तक रूक जाए
सुना है कि साँस रूक जाए तो रूठे हुए यार भी देखने आते हैं

टूट जायेगी तुम्हारी ज़िद की आदत उस दिन
जब पता चलेगा की याद करने वाला अब याद बन गया

तु होगी चाँद का टुकडा ,
पर मे भी मेरे पापा का जीगर का टुकडा हु..

लिख रहा हूँ अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा; मेरे लहू का हर एक क़तरा इंक़लाब लाएगा; मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि; मेरे बाद वतन पे मरने वालों का सैलाब आएगा।

मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमको
भुला दिया सब ने ये कह कर की तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

मेरी जिंदगी का खेल शतरंज से भी मज़ेदार निकला
मैं हारा भी तो अपनी हीं रानी से

मौजूद थी उदासी अभी तक पिछली रात की
बहला था दिल ज़रा सा की फिर रात हो गई

अकेले रोना भी क्या खूब कारीगरी हैं
सवाल भी खुद का रहता है और जवाब भी खुद का

रोज़ रोते हुए कहती है ये ज़िंदगी मुझसे
सिर्फ एक शख्स कि खातिर मुझे बर्बाद मत कर

पता नही कब जायेगी तेरी लापरवाही की आदत.
पागल कुछ तो सम्भाल कर रखती मुझे भी खो दिया.

चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्तां सुनकर
ख़ामोशी तुम समझोगे नही और बयाँ हमसे होगा नही