ऐ दोस्त बांध ले कफन मे व्हिस्की की बोतल कब्र मेँ बैठकर पिया करेगे; इन लङकियो से तो मिली बेवफाई अब चुड़ैलों से सेटिंग किया करेंगे!

न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है; अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है।

मयखाने सजे थे जाम का था दौर; जाम में क्या था ये किसने किया गौर; जाम में गम था मेरे अरमानों का; और सब कह रहे थे एक और एक और।

कुछ नशा तो आपकी बात का है; कुछ नशा तो धीमी बरसात का है; हमें आप यूँ ही शराबी ना कहिये; इस दिल पर असर तो आप से मुलाकात का है।

पैमाना कहे है कोई मय-ख़ाना कहे है; दुनिया तेरी आँखों को भी क्या क्या न कहे है।

तोहफे में मत गुलाब लेकर आना; मेरी क़ब्र पर मत चिराग लेकर आना; बहुत प्यासा हूँ अरसों से मैं; जब भी आना शराब लेकर आना।

मैं तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती; मैं जवाब बनता अगर तू सवाल होती; सब जानते हैं मैं नशा नही करता; मगर मैं भी पी लेता अगर तू शराब होती।

थोड़ी सी पी शराब थोड़ी उछाल दी कुछ इस तरह से हमने जवानी निकाल दी!

पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के ग़ालिब; या वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं है।

मेरी तबाही का इल्जाम अब शराब पर है; करता भी क्या और तुम पर जो आ रही थी बात।

तनहइयो के आलम की ना बात करो जनाब; नहीं तो फिर बन उठेगा जाम और बदनाम होगी शराब।

मैखाने मे आऊंगा मगर पिऊंगा नही साकी; ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात नही रखती।

मैं थोड़ी देर तक बैठा रहा उसकी आँखों के मैखाने में; दुनिया मुझे आज तक नशे का आदि समझती है।

मैं नहीं इतना घाफिल कि अपने चाहने वालों को भूल जाऊं; पीता ज़रूर हूँ लेकिन थोड़ी देर यादों को सुलाने के लिए!

उम्र भर भी अगर सदाएं दें;​बीत कर वक़्त फिर नहीं मरते;​​सोच कर तोड़ना इन्हें साक़ी;​टूट कर जाम फिर नहीं जुड़ते।​