मैंने छोड़ दिया है किस्मत पर यकीन करना
अगर लोग बदल सकते है तो किस्मत क्या चीज है

हर यार यार नहीं होता हर दोस्त वफादार नहीं होता
दिल आने की बात है वरना सात फेरो के बाद भी प्यार नहीं होता

लोग समजते हे की में तुम्हारे हुस्न पे मरता हूँ , अगर तुम भी यही समजते हो तो सुनो ; जब हुस्न खोदो तब लौट आना !!

यु ही उम्मीद दिलाते है ज़माने वाले
कब लौटकर आते है जाने वाले

हर एक चेहरा यहाँ पर गुलाल होता है
हमारे शहर मैं पत्थर भी लाल होता है

ना वो मिलती है, ना मैं रुकता हूँ;
पता नहीं रास्ता गलत है, या मंजिल!

सबको मालुम है की जिंदगी बेहाल है
फिर भी लोग पूछते है क्या हाल है

हम तो हँसते हैं दूसरो को"हंसाने की खातिर"..
दोस्तों
वरना "दिल पे ज़ख़्म" इतने हैं क रोया भी नहीं जाता

हम जिंदगी की भागदौड़ मे इतने लीन हो गए
पता ही नहीं चला गोलगप्पे कब 10 के तीन हो गए

मेरी काबिलियत को तुम क्या परखोगे ए गालिब
इतनी छोटी सी उमर मेँ ही लाखो दुश्मन बना रखे हैं

तमाम उम्र इसी बात का गुरुर रहा मुझे
किसी ने मुझसे कहा था की हम तुम्हारे है

शायरों की महफ़िलों में हम इसलिए भी जाते हैं
हम से बिछड़ कर शायद वो भी शायर हो गयी हो

तलवार कि धार से ज्यादा हमारी जुबान चलति हें
मौत का ख्वाब क्या दिखाता हे वो तो खुद हमसे डरती हे

इतनी मनमानियाँ भी अच्छी नहीं होती
तुम सिर्फ अपने ही नहीं मेरे भी हो

अगर हारने से ड़र लगता है त जीतने की इच्छा कभी मत रखना
कामयाब लोग अपने फैसले से दुनियाँ बदल देते हैं
और नाकामयाब लोग दुनियाँ के डर से अपने फैसले बदल लेते हैं