हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ ग़ालिब; नसीब उन के भी होते हैं जिन के हाथ नहीं होते।

एक मेरा ही हाथ नहीं थामा उस ने; वरना गिरते हुए कितने ही संभाले उसने।

मेरी बात सुन ‪पगली‬ अकेले ‎हम‬ ही शामिल नही है इस ‪जुर्म‬ में
‎जब नजरे‬ मिली थी तो ‪मुस्कराई तू‬ भी थी

मिला वो भी नहीं करते मिला हम भी नहीं करते; वफ़ा वो भी नहीं करते वफ़ा हम भी नहीं करते; उन्हें रुस्वाई का दुःख हमें तन्हाई का दर्द; गिला वो भी नहीं करते शिकवा हम भी नहीं करते।

आदत बऩा ली मैने खुद को तकलीफ देने की
ता कि जब कोई आपना तकलीफ दे तो ज्यादा तकलीफ ना हो

बन गए गैर अपने होते हुए; जब तुम वाकिफ हो गरीबी से मेरी।

ऐ खुदा मुसीबत मैं डाल दे मुझे
किसी ने बुरे वक़्त मैं आने का वादा किया है

हा मैं उस से मुहब्बत करता हूँ कितनी करता हूँ इसकी कोई कसौटी नहीँ
इसे सिर्फ़ मैं समझ सकता हूँ इसे सिर्फ़ मैं महसूस कर सकता हूँ

सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे; लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे।

कोई जुदा हो गया कोई ख़फ़ा हो गया; यह दुनिया के लोगों को क्या हो गया; जिस सजदे में मुझे उस को माँगना था रब से; अफ़सोस वही सजदा क़ज़ा हो गया।

आजमाना है अगर मेरे ऐतबार को
तो एक झूठ तुम बोलो और फिर मेरा यकीन देखो

सब शिकवे हमसे कागज पर उतारे ना जाएंगे; कहीं पढ़ने वाला तुम्हें बददुआ ना दे दे।

शिकायतें भी थी उसे तो मेरे ख़ुलूस से; अजीब था वो शख्स मेरी आदतें ना समझ सका।

​गुज़र गया वो वक़्त जब तेरी हसरत थी मुझको​;​अब ​ खुदा भी बन जाए तो भी तेरा सजदा ना करूँ..

सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब; बचपन वाला इतवार अब नहीं आता।