ना जाने यह नज़रें क्यों उदास रहती हैं; ना जाने इन्हे किसकी तलाश रहती है; जानती हैं यह कि वो किस्मत में नहीं; लेकिन फिर भी ना जाने क्यों उन्हें पाने की आस रखती हैं।

खुदा जाने प्यार का दस्तूर क्या होता है; जिन्हें अपना बनाया वो न जाने क्यों दूर होता है; कहते हैं कि मिलते नहीं ज़मीन आसमान; फिर न जाने क्यूँ आसमान ज़मीन का सरूर होता है!

उन्हें एहसास हुआ है इश्क़ का हमें रुलाने के बाद; अब हम पर प्यार आया है दूर चले जाने के बाद; क्या बताएं किस कदर बेवफ़ा है यह दुनिया; यहाँ लोग भूल जाते ही किसी को दफनाने के बाद।

तेरी नज़रों से दूर जाने के लिए तैयार तो थे हम; फिर इस तरह नज़रें घुमाने की जरूरत क्या थी;​​ तेरे एक इशारे पे हम इल्जाम भी अपने सिर ले लेते​;​ फिर बेवजह झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थी।

जो आँसू दिल में गिरते हैं वो आँखों में नहीं रहते; बहुत से हर्फ़ ऐसे हैं जो लफ़्ज़ों में नहीं रहते; किताबों में लिखे जाते हैं दुनिया भर के अफ़साने; मगर जिन में हक़ीक़त हो वो किताबों में नहीं रहते।

गर्मिये हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं; हम चिरागों की तरह शाम से जल जाते हैं; शमा जलती है जिस आग में नुमाइश के लिए; हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं; जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ; जाने क्यों लोग मेरे नाम से जल जाते हैं।

हो अगर कोई शिकायत मुझ..
तो साफ साफ कह देना..

जरा सी वक़्त ने करवट क्या बदली; मेरे अपनों के नक़ाब गिर गए।

ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे; तू बहुत देर से मिला है मुझे।

दुनियां ने याद से बेगाना कर दिया; तुझसे भी फ़रेब है ग़म रोज़गार के।

ग़ज़ब किया तेरे वादे पर ऐतबार किया; तमाम रात क़यामत का इंतज़ार किया।

जिसकी आँखों में कटी थी सदियाँ; उसने सदियों की जुदाई दी है! गुलज़ार

एक लम्हा ना दिया साथ तुने मेरा; जबकि तेरे लिए हमने ज़िंदगी गुजार दी।

दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो; ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी।

देखा है आज मुझे भी गुस्से की नज़र से; मालूम नहीं आज वो किस-किस से लड़े है।