दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था; जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था।

हर कोई मिलता है यहाँ पहन सच का नक़ाब; मुश्किल है पहचान पाना यहाँ कौन अच्छा है कौन ख़राब।

मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला; तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।

मेरी कबर पे वो रोने आये हैं; हम से प्यार है ये कहने आये हैं; जब ज़िंदा थे तो रुलाया बहुत; अब आराम से सोये हैं तो जगाने आये हैं।

अपना समझा तो कह दिया वरना; गैरों से तो कोई गिला नहीं होता; कुछ न कुछ पहले खोना पड़ता है; मुफ्त में तो कोई तज़ुर्बा नहीं मिलता।

वह कहता है पागल है वो तो; जो मेरी बातों को अपने दिल पर ले ​गई; मैंने तो कभी उसे अपना माना ही नहीं था; वो तो खुद-ब-खुद मेरी होकर रह गई।

तुझे मुफ्त में जो मिल गए हम​;​​​​ ​तु कदर ना करे ये तेरा हक़ बनता है​।

बडे अजीब है इस दुनिया में लोग
ये ऊपरवाले को तो एक मानते हैं लेकिन ऊपरवाले कि एक नही मानते

मुक्कदर का गरीब दिल का अमीर था; मिलकर बिछड़ना मेरा नसीब था; चाह कर भी कुछ कर न सके हम; घर जलता रहा और समुन्दर करीब था।

तुझे मोहब्बत करना नहीं आता; मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ और नहीं आता; ज़िन्दगी गुजारने के बस दो ही तरीके हैं; एक तुझे नहीं आता और एक मुझे नहीं आता।

तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी; मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी; रहे मोहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर; ना तुमको कुर्बत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी; हज़ार उल्फ़त सताए लेकिन मेरे इरादों से है ये मुमकिन; अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी।

ये मंजिले मुझे रास आती नहीं ऐ रास्तो मुझे अपना हमसफ़र बना लो।

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर; इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ।

मेरी हर बात को उल्टा वो समझ लेते हैं; अब के पूछा तो कह दूंगा कि हाल अच्छा है।

तहज़ीब में भी उसकी क्या ख़ूब अदा थी; नमक भी अदा किया तो ज़ख़्मों पर छिड़क कर।