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Bewafa Shayari
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित
पोथी पढ़ि - पढ़ि जग मुआ पंडित हुआ न कोय ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पण्डित होय।
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प्रेमिका: जब तुम्हें मेरे याद आती
नफरत बदसूरत निशान छोड़ती है प्यार
कभी पसंद न आये साथ मेरा
तेरे हाथ की मैं वो लकीर
किसी की आँखों मे मोहब्बत का
कभी भी ख़ुशी मे शायरी नहीं
वो करते हैं बात इश्क़ की;
दोस्ती नज़रों से हो तो उसे
चाहने से प्यार नहीं मिलता; हवा
तेरी खुशबू को ज़रा महसूस करूँगा;
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