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Heart Touching
अब भी इल्जामएमोहब्बत है हमारे सिर
अब भी इल्जामएमोहब्बत है हमारे सिर
अब भी इल्जाम-ए-मोहब्बत है हमारे सिर पर; अब तो बनती भी नहीं यार हमारी उसकी।
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उस बुलंदी से तुमने नवाजा क्यों
यहाँ गमगीन मत होना कोई जो
तुझे दुश्मनों की खबर न थी
जरा सी वक़्त ने करवट क्या
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वो जो हममें तुममें क़रार था
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जिस से चाहा था बिखरने से
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