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Inspirational Shayari
तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ
तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ
तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ ले आए हो
दोस्त ये सिक्का तो बरसों से नहीं चलता
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सुबह सुबह कोई बहोत ही प्यार
क़ाश कोई ऐसा हो जो गले
इतनी मनमानियाँ भी अच्छी नहीं होतीतुम
बचपन में जब चाहा हँस लेते
अगर तेरी नजरें कतल करने में
यूं अकड मे रहना बंद कर
ये रात में मोटरसाइकील के पीछे
फिर वफायें भी करोगे तो कोई
सारी उम्र पूजते रहे लोग अपने
मेरे attitude पर मत जाना तुम्हारे
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