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हमदर्दियाँ जनाब अब काटती हैं मुझेखामखा
हमदर्दियाँ जनाब अब काटती हैं मुझेखामखा
हमदर्दियाँ जनाब अब काटती हैं मुझे
खामखा मिज़ाज न पुछा करे कोई
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हमे दुवाए दिल से मिली हैकभी
कुछ कर गुजरने की चाह में
कोइ ऐसा कानून बना दो साहबकि
कोई और तरीक़ा बताओ जीने का
तेरी आँखों की तौहीन नहीं तो
ऐ खुदा मेंरी किस्मत से खेलना
इश्क़ का पासपोर्ट बनवा दे कोईमुझे
जरा सा भी नही पिघलता दिल
वो मुझसे दूर रहकर अगर खुश
मैं क्यूँ कुछ सोच कर दिल
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