हो जहाँ सारी खुदायी एक ही छत के नीचे
रह जाएं जिसकी रहनुमायी से मन्दिर मस्जिद पीछे
न जहाँ जूठा हो किसी का न कोई नीचा हो
है वही मैक़दा जो हर शाम दीवानों को खींचे

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