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Love Shayari
न कोई इलज़ाम न कोई तंज़
न कोई इलज़ाम न कोई तंज़
न कोई इलज़ाम न कोई तंज़ न कोई रुसवाई मीर; दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की!
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ख़ुदा तूने तो लाखों की तकदीर
कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो
तुम फिर ना आ सकोगे बताना
बेखुदी ले गई कहाँ हमको; देर
पटाने को हम भी पटा लें
रात पूरी जाग कर गुजार दूं
ना में तुम्हे खोना चाहता हूँ
जिनकी आँखें आँसुओं से नम नहीं;
युं ही हम दील को साफ
काश आंसुओ के साथ यादे भी
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