आज फिर वो मुझपे एक कर्ज़ कर गया,
वो फ़कीर बिन कुछ पाये मुझे दुआ दे गया!

मै फिर से निकलूंगा तलाश -ए-जिन्दगी में ....
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दुआ करना दोस्तों इस बार किसी से इश्क ना हो .....

मेरे सजदे की दुआएँ तुम क्या जानो हमदम
सर झुका तो तेरी खुशी माँगी हाथ उठे तो तेरी जिँदगी माँगी

इंतजार है मुझे नफ़रत करने वाले कुछ नए लोगो का
पुराने नफ़रत करने वाले तो अब मुझे पसंद करने लगे है

पुराना कहकर जिस कम्बल को ठुकरा दिया रईस के बेटे ने। ...
गरीब के बच्चे उसी कम्बल के बदले सैंकड़ो दुआएँ दे गए।....

साथ रोती थी हँसा करती थी एक परी मेरे दिल में बसा करती थी
किस्मत थी हम जुदा हो गए वरना वो मुझे अपनी तकदीर कहा करती थी

तेरे चहेरे की चमक सदा बनी रहे हंसी इन लबो पे हमेशा सजी रहे
दूर रखे खुदा सारे गमो से तुझे खुशिया तेरे दामन में बिछी रहे

हम तो तराश देते पत्थरो को भी
उसे हम मोम को भी ना पिघलाना आया

थी जिसकी मौहब्बत में मौत भी मंजुर
आज उसकी नफरत ने जिना सिखा दिया

जरा सी बात पर बरसों के याराने गए
मगर इतना तो हुआ कि कुछ लोग पहचाने गए

: छत टपकती है उसके कच्चे घर की ,
वो किसान फिर भी बारिश की दुआ
माँगता है ।।

ना जाने किसकी दुआओं का फैज़ है मुझपर,
मैं डूबता हूँ और दरिया उछाल देता है...

एक ‪कतरा‬ ही सही एसी ‪नीयत‬ दे मौला
किसी को ‪प्यासा‬ देखूँ तो ‪दरिया‬ हो जाऊँ

“टूटता हुआ तारा सबकी दुआ पूरी करता है...,
क्योंकि उसे टूटने का दर्द मालूम होता है।”

जाने क्यूँ ये दिल खींचा जाता है उसकी
तरफ,
क्या उसने भी मुझे पाने की दुआ
मांगी है.??