गिला आपसे नहीं कोई; गिला अपनी मज़बूरियों से करते हैं; आप आज हमारे करीब ना सही; मोहब्बत तो हम आपकी दूरियों से भी करते हैं।

ढलती शाम का खुला एहसास है; मेरे दिल में तेरी जगह कुछ ख़ास है; तुम दूर हो ये मालूम है मुझे; पर दिल कहता है तू यहीं मेरे आस-पास है।

बहेंगी जब सर्द हवाएं; हम खुद को तनहा पाएँगे; एहसास तुम्हारे साथ का; हम कैसे महसूस कर पाएँगे।

काश वो पल संग बिताये न होते; जिनको याद कर आज ये आँसू आये न होते; अगर इस तरह उनको मुझसे दूर ले जाना था; तो इतनी गहराई से दिल मिलाये न होते।

वो जो हमारे लिए ख़ास होते हैं; जिनके लिए दिल में एहसास होते हैं; चाहे वक़्त कितना भी दूर कर दे उन्हें; पर दूर रहकर भी वो दिल के पास होते हैं।

अब अगर जुबान से नाम लेते हैं; तो इन आँखों में आँसू आ जाते हैं; कभी घंटो बातें किया करते थे; और अब एक लफ्ज़ के लिए तरस जाते हैं।

दूरियों की न परवाह कीजिए; दिल जब भी पुकारे हमें बुला लीजिए; हम ज़्यादा दूर नहीं आपसे; बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिए।

वो मिल जाते हैं कहानी बनकर; दिल में बस जाते हैं निशानी बनकर; जिन्हें हम रखते हैं आँखों में; जाने वो क्यों निकल जाते हैं पानी बनकर।

जो जितना दूर होता है नज़रों से उतना ही वो दिल के पास होता है मुश्किल से भी जिसकी एक झलक देखने को ना मिले वही ज़िंदगी मे सबसे ख़ास होता है|

उस वक्त दिल कितना मजबूर होता है; जब कोई किसी की यादों में चूर-चूर होता है; रिश्ता क्या था पता चलता है तब; जब कोई निगाहों से बहुत दूर होता है।

बादल कितने खुशनसीब हैं दूर रहकर भी ज़मीन पर बरसते हैं; हम कितने बदनसीब हैं पास रहकर भी मिलने को तरसते हैं।

आँखों के सागर में ये जलन है कैसी; आज दिल को तड़पने की लगन है कैसी; बर्फ की तरह पिघल जाएगी जिंदगी; ये तेरी दूर रहने की कसम है कैसी।

मैं उससे दूर चला तो आया हूँ; मगर अभी तक उसे ना भूल पाया हूँ; जिक्र किस से करूँ तेरी वफाओं का मैं; इस अजनबी शहर में भटकता साया हूँ।

तुम पास हो तो तुझपे प्यार आता है; तुम दूर हो तो तेरा इंतज़ार सताता है; क्या कहें इस दिल की हालत; तुझसे दूर होकर दिल बेक़रार हो जाता है।

यादों में हम रहें हमेशा यही एहसास रखना; नज़रों से दूर पर दिल के पास रखना; हम यह नहीं कहते कि साथ रहो; दूर से ही पर दुआयों में याद रखना।