खुदा की बनाई कुदरत नहीं देखी; दिलों में छुपी दौलत नहीं देखी; जो कहता है दूरी से मिट जाती है दोस्ती; उसने शायद हमारी दोस्ती नहीं देखी।

गिला आपसे नहीं कोई; गिला अपनी मज़बूरियों से करते हैं; आप आज हमारे करीब ना सही; मोहब्बत तो हम आपकी दूरियों से भी करते हैं।

वो मिल जाते हैं कहानी बनकर; दिल में बस जाते हैं निशानी बनकर; जिन्हें हम रखते हैं आँखों में; जाने वो क्यों निकल जाते हैं पानी बनकर।

ढलती शाम का खुला एहसास है; मेरे दिल में तेरी जगह कुछ ख़ास है; तुम दूर हो ये मालूम है मुझे; पर दिल कहता है तू यहीं मेरे आस-पास है।

बहेंगी जब सर्द हवाएं; हम खुद को तनहा पाएँगे; एहसास तुम्हारे साथ का; हम कैसे महसूस कर पाएँगे।

अब अगर जुबान से नाम लेते हैं; तो इन आँखों में आँसू आ जाते हैं; कभी घंटो बातें किया करते थे; और अब एक लफ्ज़ के लिए तरस जाते हैं।

काश वो पल संग बिताये न होते; जिनको याद कर आज ये आँसू आये न होते; अगर इस तरह उनको मुझसे दूर ले जाना था; तो इतनी गहराई से दिल मिलाये न होते।

वो जो हमारे लिए ख़ास होते हैं; जिनके लिए दिल में एहसास होते हैं; चाहे वक़्त कितना भी दूर कर दे उन्हें; पर दूर रहकर भी वो दिल के पास होते हैं।

बादल कितने खुशनसीब हैं दूर रहकर भी ज़मीन पर बरसते हैं; हम कितने बदनसीब हैं पास रहकर भी मिलने को तरसते हैं।

दूरियों की न परवाह कीजिए; दिल जब भी पुकारे हमें बुला लीजिए; हम ज़्यादा दूर नहीं आपसे; बस अपनी आँखों को पलकों से मिला लीजिए।

जो जितना दूर होता है नज़रों से उतना ही वो दिल के पास होता है मुश्किल से भी जिसकी एक झलक देखने को ना मिले वही ज़िंदगी मे सबसे ख़ास होता है|

उस वक्त दिल कितना मजबूर होता है; जब कोई किसी की यादों में चूर-चूर होता है; रिश्ता क्या था पता चलता है तब; जब कोई निगाहों से बहुत दूर होता है।

दर्द में कोई मौसम प्यारा नहीं होता; दिल हो प्यासा तो पानी से गुजारा नहीं होता; कोई देखे तो हमारी बेबसी; हम सबके हो जाते पर कोई हमारा नहीं होता!

तनहा रहना तो सीख लिया हमने; पर खुश कभी ना रह पायेंगे; तेरी दूरी तो फिर भी सह लेता है ये दिल; पर तेरी मोहब्बत के बिन जी ना पायेंगे!

आँखों के सागर में ये जलन है कैसी; आज दिल को तड़पने की लगन है कैसी; बर्फ की तरह पिघल जाएगी जिंदगी; ये तेरी दूर रहने की कसम है कैसी।