मैं उससे दूर चला तो आया हूँ; मगर अभी तक उसे ना भूल पाया हूँ; जिक्र किस से करूँ तेरी वफाओं का मैं; इस अजनबी शहर में भटकता साया हूँ।

तुम पास हो तो तुझपे प्यार आता है; तुम दूर हो तो तेरा इंतज़ार सताता है; क्या कहें इस दिल की हालत; तुझसे दूर होकर दिल बेक़रार हो जाता है।

यादों में हम रहें हमेशा यही एहसास रखना; नज़रों से दूर पर दिल के पास रखना; हम यह नहीं कहते कि साथ रहो; दूर से ही पर दुआयों में याद रखना।

दिल तोड़ना शायद उनकी आदत सी हो गयी है; वरना वो तो फूल भी नहीं तोड़ते थे; आज हमसे दूर-दूर से रहते हैं वो; एक वक़्त था जब साथ नहीं छोड़ते थे वो!

आपसे दूर जाने का इरादा भी ना था; सदा साथ रहने का वादा भी ना था; आप भुल जाओगे हमे ये तो जानते थे; पर इतनी जल्दी भुल जाओगे ये अंदाजा ना था।

बनाने वाले ने दिल कांच का बनाया होता; तोड़ने वाले के हाथ में जख्म तो आया होता; जब भी देखता वो अपने हाथों को; उसे हमारा ख्याल तो आया होता।

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं है बात तो दिलों की नज़दीकियों से होती है; दोस्ती तो कुछ ख़ास आप जैसे से ही है वरना मुलाक़ात ना जाने कितनों से होती है।

है अगर दूरियां बहुत तो इतना समझ लो; कि पास रह कर भी कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता; हो तुम मेरे दिल के पास इतने कि; दूर रह कर भी दूरियों का एहसास नहीं होता।

दिल के दर्द को छुपाना कितना मुश्किल है; टूट के फिर मुस्कुराना कितना मुश्किल है; किसी के साथ दूर तक जाओ फिर देखो; अकेले लौट के आना कितना मुश्किल है।

अभी कुछ दूरियां तो कुछ फांसले बाकी हैं; पल-पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी है; हमें यकीन है कि कुछ ढूंढ़ता हुआ वो आयेगा ज़रूर; अभी वो हौंसले और वो उम्मीदें बाकी हैं।

गलतियों से जुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं; दोनों इंसान हैं ख़ुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं; गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियां; वरना फितरत का बुरा तु भी नहीं था मैं भी नहीं!

भीगी पलकों के संग मुस्कुराते हैं हम; पल-पल दिल को बहलाते हैं हम;आप दूर हैं हमसे तो क्या हुआ; हर सांस में आपकी आहट पाते हैं हम।

तमाम उम्र ज़िंदगी से दूर रहे; तेरी ख़ुशी के लिए तुझसे दूर रहे; अब इस से बढ़कर वफ़ा की सज़ा क्या होगी; कि तेरे होकर भी तुझसे दूर रहे।

आँसुओं की आवाज़ कुछ और होती है; दूरियों की आग कुछ और होती हैं; कौन चाहता है तुम से दूर रहना मगर मज़बूरियों की बात कुछ और होती है।

तमाम उम्र ज़िंदगी से दूर रहे; आपकी ख़ुशी के लिए अपनी ख़ुशी से दूर रहे; अब इससे बढ़कर वफ़ा की सज़ा क्या होगी; कि आपके होकर भी आप से दूर रहे।