दूरियां ही नज़दीक लाती हैं; दूरियां ही एक दूजे की याद दिलाती हैं; दूर होकर भी कोई करीब है कितना; दूरियां ही इस बात का एहसास दिलाती हैं।

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ; प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ; इस दिल में दर्द नहीं उसकी यादे हैं; अब यादे ही दर्द दें; तो उसे इलज़ाम क्या दूँ!

महक होती तो तितलियाँ बहुत आती; कोई रोता तो सिसकियाँ ज़रूर आती; कहने को तो लोग मुझे बहुत याद करते हैं; मगर याद करते तो हिचकियां जरूर आती।

कभी दिल को कभी शमा को जला कर रोये; तेरी याद को दिल से लगा कर हम रोये; रात की गोद में जब सो गयी सारी दुनिया; चाँद को तेरी तस्वीर बना कर हम रोये।

तुझे भूलने का कभी हौंसला ना हुआ; दूर रहकर भी तू मुझसे जुदा ना हुआ; तुझसे मिल के हम किसी से क्या मिलते; कोई तेरे जैसा इस जहाँ में दूसरा न हुआ।

आपकी याद में दीवाने से फिरते हैं; तन्हाई में अक्सर आपको तलाश करते हैं; जिंदगी वीरान सी है आपके जाने के बाद; आज भी हम तुमसे प्यार करते हैं।

वक्त हर चीज़ मिटा देता है; हसीन लम्हों को भुला देता है; पर नहीं मिटा सकता दोस्तों की यादें; क्योंकि वक्त खुद ही दोस्तों की याद दिला देता है।

यूँ रिश्ता निभाएंगे कि आपकी आँखों में खुद के लिए फिक्र छोड़ जाएंगे; कल हम भले ही हों ना हों; लेकिन आपकी हर एक याद में अपना ज़िक्र छोड़ जाएंगे।

साँसों से प्यारी यादें हैं तुम्हारी; धड़कन से प्यारी बातें हैं तुम्हारी; तुम्हें यकीन हो न हो पर; इस जिंदगी से प्यारी दोस्ती है तुम्हारी।

बनकर लब्ज मेरी किताबों में मिलना; बनकर खुशबु की महक मेरे गुलाबों में मिलना; जब आयेगी तुम्हें हमारी याद; तब बनकर ख्वाब मेरी आँखों में मिलना!

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ; प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ; इस दिल में दर्द नहीं यादें हैं उसकी; अब यादें ही मुझे दर्द दें तो इल्ज़ाम क्या दूँ।

यूँ ही मुड़कर ना देखा होगा उन्होंने; अभी कुछ चाहत तो बाकी होगी; भले ही जी रहे होंगे कितने सुकून से वो; तड़पने के लिए हमारी बस एक याद ही काफी होगी।

गहरी थी रात लेकिन हम खोये नहीं; दर्द बहुत था दिल में मगर हम रोए नहीं; कोई नहीं हमारा जो पूछे हमसे; जाग रहे हो किसी के लिए या किसी के लिए सोए नहीं।

साँस लेने से उसकी याद आती है; और ना लेने पे जान जाती है; कैसे कह दूँ की सिर्फ़ साँसों क सहारे जिंदा हूँ; कमब्खत साँस भी तो उसकी याद के बाद आती है।

जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है; फिर हमें आराम कहाँ होता है; हौंसला मुझ में नहीं तुझको भुला देने का; काम सदियों का है लम्हों में कहाँ होता है।