शेर को सवा शेर कही ना कही जरुर मिलता है
और रही बात हमारी तो हम तो बचपन से ही शिकारी है

मेरी काबिलियत को तुम क्या परखोगे ए गालिब
इतनी छोटी सी उमर मेँ ही लाखो दुश्मन बना रखे हैं

जो उनकी आँखों से बयां होते है
वो लफ्ज़ किताबो में कहाँ होते है

मेरी बहादुरी के किस्से मशहुर थे शहर में
तुझे खो देने के डर ने कायर बना दिया

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते,
बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए ।

इंसान की फितरत को समझते हैं ये परिंदे,
कितनी भी मोहब्बत से बुलाना मगर पास नहीं आयेंगे

मैं कभी बुरा नहीं था उसने मुझे बुरा कह दिया
फिर मैं बुरा बन गया ताकि उन्हें कोई जुठा न कह सके

उस पगली‬ को‬ क्या पता जिस मंदिर में वो मेरी मौत की दुआ मांगती है
उस मंदिर में मैने अपनी जान गिरवी पर रखी है उसे पाने के लिए

सपना कभी साकार नहीं होता; मोहब्बत का कोई आकार नहीं होता; सब कुछ हो जाता है इस दुनियां में; मगर दोबारा किसी से प्यार नहीं होता।

हद हो गई इंतजार की
ऐसी की तेसी ऐसे प्यार की

साँसों का टूट जाना तो आम बात है दोस्तों
जहाँ अपने बदल जाये मौत तो उसे कहते है

हमारा हक तो नही है फिर भी ये तुमसे कहते है
हमारी जिँदगी ले लो मगर उदास मत रहा करो

सूरज आग उगलता है सहना धरती को पड़ता है
मोह्हबत निगाहे कराती है सहेना दिल को पड़ता है

हमारी सोच और लोगो कि सोच मे बस ईतना हि फर्क हे के
वो सरकारी आदमी बनना चाहते हे और हम सरकार

तुमने कहा था हर शाम तेरे साथ गुजारेगे,
तुम बदल चुके हो या फिर तेरे शहर में शाम ही नहीं होती?