लोगों ने कहा की मैं शराबी हूँ
मैने कहा उन्हो ने आँखों से पिलाइ है
लोगों ने कहा की मैं आशिक़ हूँ
मैने कहा आशिक़ी उन्हो ने सिखाई है
लोगों ने कहा राहुल तू शायर दीवाना है
मैने कहा उनकी मोहब्बत रंग लाई है

सिर्फ एहसास होता है चाहत मे इकरार नहीं होता
दिल से दिल मिलते हैं मोह्हबत में इंकार नहीं होता
ये कब समझोगे मेरे दोस्तों दिल को लफजों की जरूरत नहीं होती
ख़ामोशी सबकुछ कह देती है प्यार में इज़हार नहीं होता

सिर्फ एहसास होता है चाहत मे, इकरार नहीं होता
दिल से दिल मिलते हैं मोह्हबत में इंकार नहीं होता
ये कब समझोगे मेरे दोस्तों, दिल को लफजों की जरूरत नहीं होती
ख़ामोशी सबकुछ कह देती है प्यार में इज़हार नहीं होता

प्रेमी: अगर मुझे करोड़ों रुपये का घाटा हो जाये तो तुम फिर भी मुझसे शादी करोगी? प्रेमिका: क्या तुम्हे सच में करोड़ों रुपये का घाटा हो गया है? प्रेमी: नहीं बस मैं ऐसे ही पूछ रहा था! प्रेमिका: तब ठीक है तुमसे ही शादी करुगी!

​एक आदमी अपने सच्चे और गहरे प्रेम को उन महिलाओं मे से किसी के लिए सुरक्षित नहीं रखता जिसके पास वह विद्युतीकृत और चमकदार महसूस करता है बल्कि उस एक के लिये रखता है जिसके साथ रहकर वह कोमलता से नीँद का अनुभव करता है।​

युँही बे सबाब ना फिरा करो,
कोई शाम घर भी रहा करो..
वो गज़ल की सच्ची किताब है,
उसे छुपके-छुपके पड़ा करो..
मुझे इश्तिहार सी लगती हैं..
ये महोब्बतों की कहनीयाँ..
जो सुना नहीं वो कहा करो..
जो कहा नहीं वो सुना करो..
...

अब मेरे पास मेरे जीवन के लिए खरीदने के लिए कुछ नहीं है मैं दुखी नहीं हूँ। मैं बहुत रोता हूँ क्योंकि मैं लोगों को याद करता हूँ। वे मर जाते है और मैं रोक नहीं सकता। वो मुझे छोड़ जाते है और मुझे उनसे और ज्यादा प्रेम हो जाता है।

यूं बादल भी सहम से जाते हैं दर्दे दिल की कहानी पर
रास्तों मे फिर तनहाई बिखर जाया करती है
हम फिर से अजनबी बन जाते है ज्माने के लिए
और दुनिया का दस्तूर तो देखिए साहब
हमे जान बूझ कर मैहफिल मे बुला लेते हैं आज्माने के लिए

प्रेमिका: जब हमारी शादी हो जायेगी! मैं तुम्हारी सारी चिन्तायें और कष्ट बांट लूंगी। प्रेमी: मुझे तुमसे यही उम्मीद है लेकिन मेरी जिंदगी में कोई चिन्ता या कष्ट नहीं है। प्रेमिका: वो तो इसलिये क्योंकि अब तक हमारी शादी नहीं हुई!

तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है जिसका रास्ता बहुत खराब है
मेरे ज़ख़्म का अंदाज़ा ना लगा दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है
काटो के बदले फूल क्या दोगे आँसू के बदले खुशी क्या दोगे
हम चाहते है आप से उमर भर की दोस्ती हमारे इस शायरी का जवाब क्या दोगे

सवाल तेरे मेरे दर्मियान बाकी है...
नही अभी तो नही खत्म ज़िन्दगी होगी,
अभी तो मेरे कई इम्तिहान बाकी है !
सुबूत इसके सिवा दोस्ती का क्या दूँ मै,
अभी तो चोट के गहरे निशान बाकी है !
जो एक आसमाँ टूट भी गया है तो क्या,
अभी तो सर पे कई आसमान बाकी है

हर किसी को खुश रख सकूँ वो तरीका मुझे नहीं आता
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का सलीका मुझे नहीं आता
दिल में कुछ और जुबा पे कुछ और ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता
ए-खुदा बस इतनी शौहरत बक्शना तू मेरे नाम को के जिसके भी लबो पे आए मुस्कराहट के साथ आए

वफा के वादे वो सारे भूला गया चुप-चाप...
वो मेरे दिल की दिवारें हिला गया चुप-चाप...
ना जाने कौन सा वो बद-नसीब लम्हा था,
जो गम की आग में मुझ को जला गया चुप-चाप...
गम-ऐ-हयात के तपते हुए बया-बांन में..
हमें वो छोड के चला गया चुप-चाप...
मैं जिसको छुता हुँ वो जख्म देता...

क्यों इतना गमो से वास्ता रखने लगा हू,
खुद से ही क्यों जुदा होने लगा हुँ।
उस अनजान कि खातिर, जान पहचान वालो से,
रकीबो सा रिश्ता रखने लगा हुँ।
इतना जिद्दी तो वो खुदा भी नहीं जिसने बनाया है उसे,
क्यों उसके लिए खुदा से रूठ रहा हुँ।
बहुत दूर है वो समझता है दिल मेरा,...

ए खुदा आज ये फ़ैसला करदे उसे मेरा या मुझे उसका करदे
बहुत दुख सहे हे मैने कोई ख़ुसी अब तो मूक़दर करदे
बहुत मुश्किल लगता है उससे दूर रहना जुदाई के सफ़र को कम करदे
जितना दूर चले गये वो मुझसे उसे उतना करीब करदे
नही लिखा अगर नसीब मे उसका नाम, तो ख़तम कर ये ज़िंदगी और मुझे फ़ना करदे