उस ‪#‎इंसान‬ पर भरोसा करें जो आपके अंदर तीन बातें जान सके. . .
1- आपकी मुस्कुराहट के पीछे छिपा दुःख।
2- आपके गुस्से के पीछे छिपा प्यार।
3- आपके चुप रहने के पीछे का कारण।
"जो आपकी खामोशी से
आपकी तकलीफ का अंदाजा ना
कर सके,
उसके सामने जुबान से तकलीफ
बयान करना लफ्जों को जाया करना है।"

मेरी हर एक अदा में छुपी थी मेरी तमन्ना,
तुम ने महसुस ना की ये और बात है,
मैने हर दम तेरे ही ख्वाब देखें,
मुझे ताबीर ना मिली ये और बात है,
मैने जब भी तुझ से बात करनी चाही,
मुझे अलफाज़ ना मिले ये और बात है,
कुदरत ने लिखा था मुझको तेरी तमन्ना में
मेरी किस्मत में तु ना थी ये और बात है..
...

दूर दूर रह कर भी हम कितने करीब हैं
हमारा रिश्ता भी जाने कितना अजीब है
बिन देखे ही तेरा यूँ मोहब्बत करना मुझसे
बस तेरी यही चाहत ही तो मेरा नसीब है
पर जिसे प्यार ही ना मिला हो किसी का
वो बदकिस्मत भी यहाँ कितना गरीब है
और जिसे मिल गया हो तेरे जैसा यार यहाँ
वो शख्स भी मेरे जैसा ही खुशनसीब है

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं
नींद से मेरा ताअल्लुक़ ही नहीं बरसों से
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं
मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं

जब भी होगी पहली बारीश.. ......तुमको सामने पाऐंगे....
वो बुँदो से भरा चहरा.. ......तुम्हारा हम कैसे देख पाऐंगे..
बहेंगी जब भी सर्द हवाऐं.. ......हम खुद को तनहा पाऐंगे...
ऐहसास तुम्हारे साथ का.. ......हम कैसे महसूस कर पाऐंगे..
इस दौडती हुई जिन्दगी में.. ......हम बिल्कुल ही रुक जाऐंगे..
थाम लो हमे थमने से पहले.. ......हम कैसे युँ जी पाऐंगे..
ले डूबेगा ये दर्द हमें ...

सर्दी के मौसम का मजा अलग सा है,
रात मे रजाई का मजा अलग सा है,
धुंध ने आकर छिपा लिया सितारों को,
आपकी जुदाई का ऐहसास अब अलग सा है।
सर्द रातों को सताती है जुदाई तेरी,
आग बुझती नहीं सीने में लगाई तेरी,
जब भी चलती हैं हवाऐं..
दिल को आ जीती है फिर से याद तेरी।
आ जा अभी सर्दी का मौसम नही गुजरा,
पहाड़ो में अभी भी बर्फ जमी है..
सब क...

दिल के जख्मों को दो हवा नहीं...
दिल मे सहने की अब जगा नही...
हाल उनका मै पूछ क्या करता...
आज खुद का ही जब पता नही...
खिलखिलाकर हमेसा मिलते थे...
भूली उनकी कोइ भी अदा नही....
भोली-भाली कोई थी एक मूरत...
क्या खबर थी उसमें वफा नहीं...
कैसे कह दूँ मै बेवफा उसको...
मुझसे जब उसने कुछ कहा नही...
प्यार करतें हैं बहुत हम उनसे...
प्यार करना कोई भी खता नही...

मैने जब सोचा कि तुम बिन जिना मुश्किल बात नही,
दिन तो मुश्किल से ही गुज़रा, तुम बिन गुज़री रात कहाँ ?
ज़हर समय का वह पी लेगा, कहता है तो कहने दो..
लीडर है वो सच न मानें, अब कोई सुकरात कहाँ ।
मेरी आँखों मे बुंदे थी, जब तितली के पंख नुचे,
जी तो चाहे शहर डुबो दूँ, आँखों में बरसात कहाँ ।
तेरी याद के नाखूनों से, रोज उधेड़े जख़्मों को,
मिलन की मरहम की चाहत है, पर ऐसी कोई रात कहाँ ।

मैं तुझको भुल के जिन्दा रहुँ, खुदा ना करे..
रहेगा साथ तेरा प्यार जिन्दगी बन कर..
ये और बात मेरी जिन्दगी वफा ना करे..
ये ठीक है नही मरता कोई जुदाई में..
खुदा किसी को किसी से मगर जुदा ना करे..
सुना है उसको महोव्त दुआऐं देती है..
जो दिल पे चोट तो खाऐ मगर गिला ना करे..
अगर वफा पे भरोसा रहे ना दुनीया को..
तो कोई शख्स महोव्त का होसला ना करे..
बुझा दिया हो नसीबों ने मेरे प्यार का चाँद..

छोटी सी ज़िंदगी है, हर बात में खुश रहो ...
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जो चेहरा पास ना हो, उसकी आवाज में खुश रहो ....
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कोई रूठा हो तुमसे, उसके इस अन्दाज में खुश रहो ....
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जो लौट कर नहीं आने वाले, उन लम्हों की याद में खुश रहो ....
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कल किसने देखा है, अपने आज में खुश रहो ....
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खुशियों का इन्तजार किसलिए, दूसरों की मुस्कान में खुश रहो ...
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क्यों तड़पते हो हर पल किसी के साथ को, कभी-कभी अपने आप में खुश रहो ...
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छोटी सी तो ज़िंदगी है, हर हाल में खुश रहो ..

मिला वो भी नही करते मिला हम भी नही करते
दगा वो भी नही करते दगा हम भी नही करते
उन्हे रुसवाई का दुख हमे तन्हाई का डर
गिला वो भी नही करते शिकवा हम भी नही करते
“किसी मोड़ पर मुलाकात हो जाती है अक्सर,”
“रुका वो भी नही करते,
ठहरा हम भी नही करते.”
“जब भी देखते हैं उन्हे,
सोचते है कुछ कहें उनसे.”
“सुना वो भी नही करते,
कहा हम भी नही करते.”
“लेकिन ये भी सच है,
की मोहब्बत उन्हे भी हे हमसे”
“इकरार वो भी नही करते,
इज़हार हम भी नही करते.”